मेरठ कॉलेज गर्लफ्रेंड ने जन्मदिन पर बुर गिफ्ट की

दोस्तो, मेरा नाम अर्चित, मैं मेरठ में रहता हूँ।

यह बात जुलाई 2012 की है, मेरा दाखिला बीकॉम में हुआ था। मैं पहले दिन कॉलेज गया तो अचानक मेरी नजर एक लड़की पर गई।
क्या खूबसूरत बला थी..!
वैसे वो ज्यादा लम्बी नहीं थी.. यही कोई 5 फुट की थी। एकदम गोरी.. पूरा शरीर जैसे साँचे में ढाला गया हो। आँखें बिल्कुल स्याह काली, उम्र लगभग 18-19 की, जिसकी तरफ देख ले तो आदमी वहीं थम जाए।

मैं उसे देखते रह गया.. क्लास शुरू हुई तो पता चला कि वो मेरी क्लास में ही है।

एक दिन मैंने उससे उसका नाम पूछ लिया तो आपने अपना नाम सीमा बताया।
मैंने कहा- बहुत प्यारा नाम है, मेरा नाम अर्चित है।
यह कहते हुए मैंने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा दिया, उसने हाथ मिलाया।
सच में बहुत मुलायम हाथ थे।

फिर मैंने उससे दोस्ती करने की कोशिश की और कुछ ही दिनों में उसने मुझसे दोस्ती कर ली। हम दोनों की दोस्ती प्यार में कब बदल गई, पता ही नहीं चला।
हम रोज फोन पर बातें किया करते थे, धीरे धीरे हम सेक्स चैट करने लगे और फोन पर सेक्स करने लगे।

एक दिन मेरा जन्म दिन था तो मैंने उसे मिलने को बुलाया, हम दोनों एक होटल के रेस्टोरेंट में गए। वहाँ मैंने उसको पार्टी दी उसके बाद मैंने उससे कहा- अब मेरा गिफ्ट दो?
उसने कहा- क्या चाहिए गिफ्ट में बोलो?
मैंने कहा- तुम!
उसने कहा- मैं तुम्हारी ही तो हूँ, जो चाहे ले लो!

मैंने उसी होटल एक रूम बुक किया और हम दोनों वहाँ आ गए।
रूम में जाते ही मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए, वो भी मेरा साथ देने लगी।
हम दोनों की जीभ आपस में मिलने लगीं।

हम दोनों किस करने में इतने डूब गए थे कि पता ही नहीं चला, कई मिनट तक हम एक-दूसरे के होंठों को चूमते रहे।

मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैं भी उसकी बगल में जाकर लेट गया और उसे अपनी बाँहों में भर कर प्यार करने लगा, जिससे वो भी अपने आपको रोक न पाई, वो मुझे चूमते हुए बोलने लगी- अर्चित आई लव यू.. आई लव यू..
वो पागलों की तरह मुझे चूमने और काटने लगी।

चुम्बनों का दौर शुरू हो चला थ जिससे हम दोनों ही मजा लेकर एक दूसरे का सहयोग कर रहे थे.. जैसे हम जन्मों से प्यासे रहे हों।

कुछ ही पलों में एक-एक करके हमारे सारे कपड़े उतर चुके थे, मैं अपने हाथों से उसके दोनों चूचे दबा रहा था, कभी मैं उसके चूचों को अपने होंठों से किस करता.. तो कभी दांतों से काटता।

वो कहने लगी- तुम्हारे हाथों में तो जादू है.. किसी को एक बार प्यार से छू लो, तो वो तुम्हारी दीवानी हो जाए।
मैंने उसे चूमते हुए बोला- मेरी जान.. अभी तो बस तुम्हारा दीवाना बनने का दिल है.. तुम मुझे पहले दिन से ही बहुत पसंद थी, मैं इस घड़ी के लिए कब से बेकरार था।

फिर मैंने उसकी पेंटी को बगल से पकड़ कर नीचे खींच दिया और उसकी फूली हुई चिकनी बुर को देख कर मन ही मन झूम उठा।
क्या क़यामत ढा रही थी.. एक भी बाल न था जो कि शायद आज ही मेरे लिए उसने साफ़ किए थे।

मैंने आव देखा न ताव और झट से सीमा के चिकने भाग को चूम लिया.. जिससे वो किलकारी मार कर हँसने लगी। मैं उसकी आग भड़काने के लिए धीरे धीरे उसकी बुर के दाने को मसलने लगा.. जिसके परिणाम स्वरूप उसने आँखें बंद करके बुदबुदाना चालू कर दिया.. ‘आईईस्स्स.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… और जोर से आअह्हह हाँ.. ऐसे ही आह्ह्ह्ह.. बहुत अच्छा लग रहा है..’ जो काफी मादक था और माहौल को रंगीन कर रहा था।

वो एकदम से अकड़ कर झड़ गई। उसके कामरस से मेरी उंगलियां भी भीग गई थीं.. जो मैंने उसकी पेंटी से साफ़ कीं और फिर उसकी बुर को भी अच्छे से पोंछ कर साफ किया।

अब वो शांत लेटी थी.. तो मैं ऊपर की ओर जाकर फिर से उसके चूचों को चूसने लगा, जिससे थोड़ी देर बाद वो भी साथ देने लगी।

पर अब मेरी ‘आअह्ह्ह्ह’ निकलने की बारी थी, जो कि मुझे मालूम ही न था। फिर धीरे से उसने अपना हाथ बढ़ा कर मेरी वी-शेप चड्डी को थोड़ा उठा कर किनारे से मेरे लंड को बाहर निकाल लिया।

मेरा लंड तो पहले से ही सांप की तरह फन उठाए खड़ा था, मेरे लंड को देखते ही उसके चेहरे की ख़ुशी दुगनी हो गई और बड़े प्यार के साथ वो मेरे लंड को मुठियाने लगी.. जिससे मुझे और उसे अब दुगना मजा आने लगा था।

फिर हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए और वो मेरे लंड को छोटे बच्चों की तरह लॉलीपॉप समझ कर चूसने लगी और जीभ से रगड़ने लगी।

लंड चुसाने से मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और मैं भी उसकी बुर को आइसक्रीम की तरह चूसने और चाटने लगा। कुछ ही देर में हम दोनों झड़ने की कगार पर पहुँच गए और सारे कमरे में एक प्रकार का संगीत सा बजने लगा ‘आआह्ह्ह ह्ह्ह अह्ह्ह..’

मेरा लंड अपने पूर्ण आकार में आकर उसकी बुर में घुसने के लिए मचलने लगा था, मैं देर न करते हुए उसके ऊपर चुदाई की मुद्रा में आ गया और उसके मम्मों को रगड़ते और चुम्बन करते हुए अपने लंड को उसकी बुर पर रगड़ने लगा।
वो जोर-जोर से अपनी कमर हिलाते हुए मेरे लौड़े पर अपनी बुर रगड़ने लगी। वो किसी प्यासी लड़की की तरह गिड़गिड़ाने लगी- अर्चित अब और न तड़पा.. डाल दे अन्दर.. और मुझे अपना बना ले..

मैंने उसकी टांगों को उठाकर अपने कन्धों पर रख लीं, जिससे उसकी बुर का मुहाना ऊपर को उठ गया, फिर अपने लौड़े से उसकी बुर पर दो बार थाप मारी.. जिससे उसके पूरे जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई।
यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप अन्तर्वासना सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

एक जोर से ‘आअह्ह्ह’ निकालते हुए वो मुझसे बोली- और कितना तड़पाएगा अपनी जान को.. डाल दो जल्दी से अन्दर..
मैंने उसकी बुर के मुहाने पर लौड़े को सैट करके हल्का सा धक्का दिया.. तो लंड ऊपर की तरफ फिसल गया। फिर मैंने उसके मम्मों को पकड़ते हुए बोला- सीमा, जरा मेरी मदद तो करो?

तो उसने मेरे लौड़े को फिर से अपनी बुर पर सैट किया और अपने हाथों से बुर के छेद पर दबाव देने लगी। अब मैंने भी वक़्त की नजाकत को समझते हुए एक जोरदार धक्का दिया, जिससे मेरा आधा लौड़ा उसकी बुर की गहराई में अन्दर जाकर सैट हो गया।

इस धक्के के साथ ही सीमा के मुँह से एक दर्द भरी आवाज़ निकल पड़ी- आह.. श्ह्ह्ह्ह.. उह्ह्ह..
सीमा की बुर से खून निकल आया और वो दर्द से तड़पने लगी।

मैं थोड़ी देर रुका रहा और उसके चूची को मुँह में लेता तो कभी होंठों को चूसता। जब उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी, उसने मुझे इशारा किया कि अब धक्के लगाओ।
मैं धीरे-धीरे से उसकी बुर में धक्के लगाने लगा, वो जोर की ‘आहें..’ भरने लगी- आअह्हह.. श्ह्ह्ह ह्ह्हह..’

मैं लौड़े का उसकी बुर पर दबाव बनाते हुए उसकी तंग बुर के अन्दर अपना पूरा लंड घुसाने लगा, उसकी बुर की गर्मी को मैं अपने लंड पर महसूस कर रहा था, मुझे लग रहा था जैसे लौड़ा गर्म भट्टी में डाल दिया हो।

उसने चादर को मुट्ठियों में कस कर पकड़ लिया.. क्योंकि मैंने बहुत प्यार से लंड अन्दर डाला था। वो चिल्लाई नहीं थी, बस ‘उम्म्म्म्म आआह.. आआह.. ऊऊऊह्ह.. ऊऊ.. ऊउह्ह्ह..’ की आवाज़ें निकाल रही थी।

जब लंड पूरा अन्दर चला गया तो मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए और धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाता चला गया। मेरे हर धक्के के साथ उसकी ‘आहहह.. ऊऊह्ह..’ की आवाज़ आ रही थी, जो मुझे और जोशीला बना रही थी।

कुछ देर में वो झड़ गई, पर मेरा नहीं हुआ था तो मैं धकापेल में लगा था। कुछ देर बाद मैं भी चरम पर आया तो मैंने लंड खींच लिया और बाहर झड़ गया।
अब मैं उसकी बगल में लेट गया।

फ़िर हम दोनों ने कपड़े पहने और उसको अपनी बांहों में लेकर लंबी किस की और वहाँ से निकल आए।

इसके बाद मैंने उसे किस-किस तरह से चोदा.. वो मैं अगली बार बताऊँगा।

आप अपने विचार मुझे नीचे लिखे ई-मेल पर भेज सकते हैं।

ऐसी ही कुछ और गरमा गर्म कहानियाँ: