कर्जदार की बीवी से मिला चुदाई का सुख

दोस्तो, मेरा नाम रवि साहू है और मैं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हूँ. मेरी उम्र 32 साल है. मेरी ऊंचाई 5 फीट 5 इंच गेहुंआ रंग है. मैं अन्तर्वासना सेक्स कहानी से पिछले 2 साल से जुड़ा हूँ और इसमें सेक्स कहानी पढ़ते आ रहा हूँ. सबके कहानियां पढ़ने के बाद मुझे भी इच्छा हुई कि मैं भी अपनी कहानी आपको बताऊं.
तो आज मैं आपको अपनी एक भाभी के बारे में बताने वाला हूँ कि कैसे मैंने उन भाभी जी को उनकी सहमति से भोगा.

ये बात तब की है, जब मैं 22 साल का था और फायनेंस कंपनी में फील्ड ऑफिसर के रूप में काम कर रहा था. मुझे रिकवरी के लिए जाना पड़ता था. एक दिन एक आदमी का पर्सनल लोन की 3 किस्तें नहीं चुकी थीं, तो मैं उसके घर गया.

जैसे ही मैंने दरवाजे की घंटी को बजाया, तो एक बहुत ही खूबसूरत महिला ने दरवाजा खोला. मैं उनको देखता ही रह गया … क्या मस्त शरीर की मालकिन थीं. उनका 36-26-38 का फिगर बड़ा ही कंटीला और एकदम संगमरमर की तरह गोरा बदन था.

उन्होंने बोला- आपको किन से मिलना है?
मैंने उनके पति का नाम लेते हुए बताया कि उनके लोन का पेमेंट नहीं हुआ है … आज अगर पैसा नहीं मिला, तो रिकवरी के लिए भेज देंगे.
इतने में वो भाभी जी बोलीं- नहीं ऐसा मत करो … रिकवरी के मत भेजो, अभी उनका काम छूट गया है, जिस वजह से क़िस्त नहीं दे पाए हैं.

हालांकि मुझे मालूम था कि ये बात पूरी तरह से सच नहीं है, अन्दर की बात ये थी कि उनका पति शराबी था. जहां वो काम करता था, वहां से शराब पीने के कारण उसे निकाला गया था.

मैंने उनसे पूछा, तो उन्होंने बताया कि पैसों के इंतजाम लिए कहीं गए हुए हैं, शाम तक आ जाएंगे.
फिर मैं वहां से चला आया.

ऑफिस में बैठकर मैं उन भाभी के बारे में सोच रहा था. मेरा काम करने का मन नहीं हो रहा था. शाम को छुट्टी हो गई, तो मैंने सोचा क्यों न एक बार और उनके घर चला जाए.

वैसे भी मुझे अपने घर जाने के लिए उनके मोहल्ले को पार करके जाना पड़ता था. मैं ऑफिस से निकल कर उनके घर गया. दरवाजे की घंटी बजाने पर फिर से वो ही निकलीं. इस बार उन्होंने नाइट सूट पहना हुआ था. इस वक्त तो भाभी जी सुबह से ज्यादा मस्त माल लग रही थीं.

मुझे देखते हुए ही उन्होंने बताया- मेरे पति तो अभी आए ही नहीं हैं.

मैं जाने लगा, तभी अन्दर से उनके पति के चिल्लाने का आवाज आई- कौन है किससे बात कर रही हो?

मैं घर के अन्दर गया, तो वो शराब पी रहा था और अपनी बीवी को गाली दे रहा था. उसने मुझे देखा तो भाभी का पति एकदम से घबरा गया और फिर कहने लगा कि अरे आप थे … मुझे लगा कि पता नहीं कौन है. भाईसाब, कल से 7 दिनों के अन्दर मैं पैसा जमा कर दूंगा.

उसकी बात से मैंने नहीं माना और मैंने रिकवरी भेजने की धमकी दी.

इस पर उसकी पत्नी यानी मस्त भाभी जी हाथ जोड़ कर बोलीं- हमारी इज्जत खराब हो जाएगी.
मैं उन पर भी चिल्लाया, लेकिन वो रोने लगीं. ये मुझे अच्छा नहीं लगा.

फिर मैंने मोबाइल नंबर मांगा, तो उसके पति के पास मोबाइल नहीं था, वो साला पूरा शराबी था और उसने पता नहीं किस किस से लेन देन का झंझट पाला हुआ था. इसलिए वो फोन नहीं रखता था.

मेरे फोन नम्बर मांगने पर उसकी पत्नी ने अपना नंबर दे दिया. मैंने उनके पति को समझाया कि अपने बीवी बच्चों को देखो, शराब पीने से तुम्हारा नौकरी छूट गई. आज तुम इसी शराब के कारण पैसे के लिए तरस रहे हो.

वो मेरी बात सुनता रहा, मगर उसने मुझसे कुछ नहीं कहा. मैं उससे जल्दी पेमेंट देने की बोल कर आ गया.

भाभी जी के घर से आते समय मैंने उनको देखा और नमस्ते की, तो भाभी जी ने एक मस्त मुस्कान देते हुए मुझसे बाय कहा. उनकी वो कातिल मुस्कान मेरा कलेजा चीर गई.

उस दिन मैंने भाभी जी को याद करके मुठ मारी, फिर दिल नहीं माना, तो मैंने उनके नंबर पर कॉल किया.
भाभी जी ने फोन उठाया. मैंने पूछा- हैलो भाभी जी, मैं बोल रहा हूँ. भैया जी कहां हैं?
वो वितृष्णा से बोलीं- शराब पी कर पड़े हैं और सो रहे हैं.
मैंने कहा- मुझे उनसे बात करनी थी.

भाभी जी ने पूछा- आप कौन?
मैं बताया कि अरे भाभी जी आपने पहचाना नहीं, मैं वही सुबह आया था … वही फायनेंसर बोल रहा हूँ.
भाभी जी ने मुझे पहचान लिया और कहा- अरे सर … मैं एकदम से पहचान नहीं पाई. दरअसल हम लोग इनकी वजह से बहुत बहुत परेशान हैं. ये अपने बच्चों के स्कूल फीस के पैसों की भी शराब पी गए. फिर मैंने अपने गहने गिरवी रख कर फीस चुका पाई है. आपने रिकवरी न भेजने की बात मानकर मुझ पर बड़ा अहसान किया है … आपका बहुत बहुत शुक्रिया.

मैं बोला- भाभी जी, मुझे आपसे बहुत सिम्पैथी है … आपने ऐसे आदमी से शादी कैसे कर ली, जो आपको गंदी गाली देता है और शराबी भी है. आप इतनी अच्छी हो … और पढ़ी लिखी हो.
भाभी जी ने बताया- अरे नहीं सर, वो पहले ऐसे नहीं थे, अभी एक साल से ऐसे हो गए हैं.
मैंने भाभी जी से पूछा- आपके बच्चे कितने हैं?
भाभी जी ने बताया कि बस 3 साल का लड़की है.
मैंने उनसे कुछ देर और इधर उधर की बात की और कहा- अच्छा ठीक भाभी जी … कोई और बात हो, तो बताना.

मैंने कॉल काट दिया और अपने काम में व्यस्त हो गया. फिर 2 दिन बाद रात 11 बजे भाभी जी का कॉल आया.

मैं भाभी जी का नम्बर स्क्रीन पर देख कर बहुत खुश हो गया. मैंने कहा- हैलो.
भाभी जी बोलीं- सर, मैं दीपा बोल रही हूँ.
मुझे अभी मालूम चला कि भाभी जी का नाम दीपा है.

मैं बोला- जी हां बोलिए भाभी जी.
भाभी जी बोलीं- आज वो फिर से शराब पी कर आए और उन्होंने मुझे बहुत मारा और गाली दी. वो बोल रहे थे कि वो मुझे गिरफ्तार करके ले जाएगा, तो ले जाए या फिर तुम जाओ, कहीं से भी पैसा लेकर आओ. मैंने कहा कि मैं कहां से लाऊं, तो बोले कि जाओ … कहीं भी धंधा करो कुछ भी करो … मुझे तो बस पैसा चाहिए.

भाभी जी ने मुझे ये बताया और रोने लगीं.

अब मैं बोला- देखिए भाभी जी … मुझे आपसे सहानुभूति है … मगर मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता क्योंकि मेरे हाथ में कुछ नहीं है. आपके पास सिर्फ 7 दिन हैं.
फिर भाभी जी बोलीं- यदि आप चाहो, तो अभी आप पैसा जमा कर दो ना … और मेरे पति के लिए भी कुछ काम बताओ. यदि मेरे लिए भी काम की जुगाड़ हो, तो मैं भी करने को राजी हूँ.
मैंने सोचा कर बोला- भाभी जी काम तो है … पर क्या आपके पति मान जाएंगे?
भाभी जी बोलीं- आप आकर समझा कर देखना.
उनकी बात पर मैं बोला- ठीक है भाभी जी … मैं आपके घर सुबह आता हूँ.

अगले दिन मैं उनके घर गया. उनके पति से मिला और उसको खूब अच्छे से समझाया.

उस वक्त तो वो मान गया. फिर मैंने उसके पति को मेरे एक दोस्त के ऑफिस में सुपरवाइजर का जॉब दिला दिया. इस जॉब से उसको 12000 रुपये महीने का काम मिल गया.

दो दिन बाद मैंने भाभी जी को बोला- अगर आप बुरा न माने और आपको गलत न लगे, तो मेरे घर में खाना बनाने का काम करोगी?
भाभी जी झट से मान गईं. मैंने 5000 महीने का बोला, वो राजी हो गईं.

फिर मैं वहां से आ गया. अगले दिन सुबह भाभी जी से कॉल किया और बोलीं- सर मैं आपके मोहल्ले में आ गयी हूँ. आपका घर कहां है.
मैं जल्दी से बाहर आया और उसे देखने लगा. भाभी जी मेरे ही घर के सामने ही खड़ी थीं. मेरे हाथ का इशारा देते ही वो मेरे घर में अन्दर आ गईं.

भाभी जी बोलीं- मैं आपका अहसान कभी नहीं भूलूंगी, मेरे पति को भी आपने काम में लगवा दिया. अनजान होते हुए भी आपने हमारे लिए सोचा.

इस पर मेरे मुँह से ऐसे ही निकल गया- आपके लिए तो भाभी जी मुझे कुछ भी करना पड़ता, तो मैं कर देता.
ये सुनकर भाभी जी बोलीं- क्या?
मैं बोला- सॉरी … मेरा मतलब वो आपको गाली दे रहा था और आप लोगों की स्थिति खराब देख कर मुझे अच्छा नहीं लगा … इसलिए मैंने ये बोला.

अब भाभी जी मेरा घर देख कर बोलीं- अरे बाप रे ये सब क्या है … सब इतने फैला हुआ सामान … ये घर है कि कबाड़खाना.
मैं बोला- भाभी जी मैं बैचलर हूँ न, इसलिए ये सब ऐसा पड़ा है.
भाभी जी बोलीं- चलो कोई बात नहीं, मैं सब देखती हूँ.

मैं नहाने घुस गया, फिर तैयार होकर काम के लिए जाने लगा.

भाभी जी बोलीं- खाना?
मैं बोला- आप आज कबाड़खाने को घर बना दो … खाना शाम को खाऊंगा. आप जब मर्जी हो चली जाना, मेरे पास दूसरी चाभी है, मैं घर खोल लूँगा.

मैं मुस्कुरा कर चला गया. भाभी जी भी हंस दीं. मैंने दरवाजे के लॉक की चाभी उनको दी और चला गया.

मैं ऑफिस में दिन भर भाभी जी के बारे में ही सोचता रहा. उनकी वो कातिल मुस्कराहट मुझे अन्दर तक गरम कर देती थी. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. उनको पाने के लिए मेरा मन मचल रहा था.

मैं शाम को 6 बजे घर पहुंच गया. जब मैं घर के अन्दर गया, तो देखा कि घर बहुत सुंदर लग रहा था.

भाभी जी अभी भी काम कर रही थीं. मैं बोला- अरे भाभी जी आप अब तक गयी नहीं?
वो बोलीं- आप खाना खा कर नहीं गए थे … पहले मैं आपको खाना खिला दूं तब जाऊंगी.

मेरा दिल खुश हो गया और मैंने हंस कर कहा- वाह भाभी जी, आपको तो मेरा बड़ा ख्याल है.
भाभी जी ने भी मुस्कुरा कर कहा- मुझे आपका ख्याल रखना अच्छा लग रहा है.

मैं खाने की टेबल पर आ गया. भाभी ने छोले की सब्जी, पूड़ी और चावल बनाया था. मैंने खाना खाया, सच में क्या स्वादिष्ट खाना बना था.

मैंने भाभी जी से बोला- वाह क्या खाना बनाया है … बहुत बढ़िया … ऐसा खाना तो किस्मत वालों को ही मिलता है.
इस पर भाभी जी बोलीं- शादी कर लीजिए … रोज ही आपको ऐसा खाना मिलेगा.
मैं तुरंत बोल पड़ा- भाभी जी कोई आप जैसी मिल जाए, तो मैं अभी शादी कर लूं.
भाभी जी बोलीं- मेरे जैसी क्यों?
मैंने बोला- खाना भी आप जैसा होना चाहिए और खिलाने वाली भी आप जैसी होना चाहिए. जैसी आप हो, वैसा ही आपका बनाया हुआ खाना है … एकदम चटपटा और नमकीन.
भाभी जी हंस कर बोलीं- अच्छा मैं नमकीन हूँ … फालतू की तारीफ मत करो … ऐसा क्या है मुझमें.
मैं बोला- नसीब वाला है आपका पति.

इस पर भाभी जी रोने लगीं.

मैं उनके पास गया और पूछा- सॉरी मैंने कुछ गलत बोल दिया क्या?
भाभी जी ने कहा- आप क्यों सॉरी बोल रहे हो … मेरी किस्मत ही खराब है. जबसे शादी हो कर अपने पति के घर आई हूं, तब से ही तकलीफ भरा जीवन जी रही हूँ. पहले मेरे सास ससुर ने दु:ख दिया … उसके बाद हम गांव से शहर आए, तो यहां ये बिगड़ गए. हमेशा शराब पी कर मारना पीटना.
इतना कह कर भाभी जी फिर से सुबकने लगीं.

मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा, तो वो पलट कर मुझसे लिपट गईं और रोने लगीं. मैंने उनके पीछे पीठ को सहला रहा था.
मैं भाभी जी से बोला- अगर आप मेरी बीवी होतीं, तो मैं आपको बहुत प्यार करता. आपकी सब इच्छा पूरा करता.

मैं भाभी जी से ये बोल ही रहा था कि तभी मेरे शेरू ने उनको टच करना शुरू कर दिया. जो भाभी जी ने भी महसूस कर लिया था.
भाभी जी मुझसे अलग हो कर बोलीं- आज से आपके घर का और आपका ख्याल मैं रखूंगी … क्या आप मेरा ख्याल रखोगे?

वो जैसे ही ये बोलीं, बस ऐसा सुनते ही मैं सीधा उनके होंठों पर टूट पड़ा. मेरे इस हमले से वो डर गईं. फिर धीरे धीरे मेरा साथ देने लगीं.

दस मिनट किस करने के बाद मैं बोला- आप मुझे गलत तो नहीं समझी न?
भाभी जी बोलीं- मैं आपको पसंद करने लगी हूं.

उनकी यह बात सुन कर, मैंने फिर से उन्हें चूमना शुरू कर दिया और भाभी जी की चूचियों को दबा दिया. भाभी जी के मम्मे बहुत बड़े और कड़क थे. मैंने जैसे ही भाभी जी के मम्मों को दबाया, उनके मुँह से आह निकल गई.

इसके बाद मैं भाभी जी को बेड पर ले गया और उनकी साड़ी को खोल दिया.

भाभी जी मुझे कामुक निगाहों से देखते हुए मेरा साथ देने लगीं. मैंने लगे हाथ भाभी जी का पेटीकोट और ब्लाउज भी निकाल दिया. अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी हुई थीं.
मैं उनकी खूबसूरती को निहार रहा था.

तभी भाभी जी बोली- सिर्फ देखते ही रहोगे या कुछ आगे भी बढ़ोगे?

मैं उनके चढ़ ऊपर गया और भाभी जी के होंठों को चूमना चालू कर दिया. मैंने भाभी जी के टमाटर से लाल हो चुके गालों पर चुम्मी की. उनकी आंखें वासना में लाल होने लगी थीं. मैंने चूमना जारी रखा और धीरे धीरे भाभी जी के गले पर चूमते हुए उनके चूचों को चूसना और दबाना चालू कर दिया.

अब वो आह आह करके कामुक आवाजें निकालने लगी थीं. मैं उनके एक निप्पल को चूस रहा था और दूसरे निप्पल को अपनी दो उंगलियों में दबा कर मींज रहा था. इससे भाभी की जोश बढ़ रहा था.

चूचियों के बाद मैं नीचे का रुख करते हुए उनके पेट पर आ गया. मैंने भाभी जी के सपाट और चिकने एकदम बेदाग़ पेट पर किस करना चालू कर दिया. मैं उनकी एकदम गोल और गहरी नाभि से खेल रहा था.

इसके बाद मैंने भाभी जी की फूली हुई डबलरोटी की तरह चूत को हाथ लगाया. भाभी जी की चूत पर बिल्कुल भी बाल नहीं थे … एकदम चिकना मैदान था मानो आज दिन में ही भाभी जी ने अपनी चूत की झांटें साफ़ की हों.

फिर मैं उनकी चूत के दाने को छेड़ने लगा. इससे भाभी एकदम से तिलमिला उठीं और उनके पूरे शरीर ने एक गहरी सी झुरझुरी ली. मैंने उनकी जांघों पर किस करते हुए चूत को सनसनी देने का काम किया.

इसके कुछ पल बाद भाभी जी उठीं और मेरे कपड़े खींचते हुए फाड़ने सी लगीं. कुछ ही पलों में भाभी जी ने मुझे पूरा नंगा कर दिया और मेरे लम्बे लंड को पकड़ कर दबाने लगीं. उन्होंने मुझे बेड पर चित लिटा दिया और मुझे ऊपर से नीचे तक किस किया. मैं अपने जिस्म पर भाभी जी के रसीले मदभरे होंठों का स्पर्श महसूस करते हुए मदमस्त हुआ जा रहा था.

तभी भाभी जी ने मेरे लंड को किस किया और मैं कुछ समझ पाता कि भाभी जी ने मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसना चालू कर दिया. लंड चुसाई शुरू होते ही मैं सातवें आसमान पर उड़ने लगा था. इतनी अच्छी और खूबसूरत भाभी मेरे लंड को चूस रही हैं, ये मुझे यकीन नहीं हो रहा था. मुझे सपना जैसा लग रहा था.

भाभी जी जोर जोर से मेरे लंड को चूस रही थीं, इससे मेरा जोश बढ़ गया और कुछ ही पलों में मैं भाभी जी के मुँह में झड़ गया.

इधर एक बात बड़ी मस्त लगी कि भाभी जी ने मेरे लंड का पूरा रस अपने मुँह में भर लिया, लेकिन उसको अपने हलक के नीचे नहीं उतारा. फिर भाभी बड़ी अदा से उठीं और मुझे जीभ देखते हुए मेरे लंड का रस मुझे दिखाने लगीं. मैंने आँख दबा कर खा जाने का इशारा किया. पर भाभी जी अपनी गांड मटकाते हुए बाथरूम की तरफ चली गईं. उधर भाभी जी ने अपना मुँह साफ किया और बाहर आ गईं. इसके बाद मैं फिर से भाभी को चूमने लगा.

अब भाभी जी बोलीं- इतना मत तड़पाओ मेरे राजा.

मैंने ओके कहा और भाभी जी के दोनों पैर पकड़ कर उनको बिस्तर पर चित लिटा दिया. मैंने उनके पैरों को फैलाया और अपने लंड को भाभी जी की चूत पर टिका दिया. लंड के सुपारे से भाभी जी की चूत के दाने को छेड़ने लगा और चूत की फांकों पर लंड घिसने लगा.

भाभी इससे तड़प उठीं और जोर जोर बोलने लगीं- आह मत तड़पाओ मेरे राजा … जल्दी से पूरा अन्दर डाल दो.

मैंने उनकी चूत की फांकों को लंड से खोलते हुए अन्दर डालने के लिए एक झटका दे मारा. पहले झटके में ही मेरा लंड इंच अन्दर घुस गया. भाभी जी लंड की मोटाई से तड़फ उठीं और चिल्लाने लगीं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
मैंने पूछा- क्या हुआ आप तो खेली खाई हो?
भाभी जी ने बताया- शराब पीने के लत ने मुझे मेरे पति संतुष्ट ही नहीं कर पाते थे, इसलिए उन्होंने मुझे महीनों से छुआ ही नहीं है. मैं प्यार की भूखी हूँ … और महीनों से चुदी नहीं हूँ.

मैं धीरे धीरे भाभी जी को पेलता रहा और उनकी चूचियों को सहलाता रहा. इस तरह मेरा पूरा लंड भाभी जी की चूत की जड़ तक उतर गया.

कुछ पल भाभी जी अपने होंठ भींचे हुए मेरे लंड से होने वाले दर्द को सहती रहीं. मैं भी पूरे लंड को चूत में पेवस्त करने के बाद रुक गया. कुछ पलों के भाभी जी ने अपनी कमर को हिलाया, तब मैंने उनकी कमर के नीचे तकिया लगाने के लिए उनको अपनी गोद में ले लिया.

भाभी जी की चूत इस वक्त मेरे पूरे लंड को अपनी बुर में लिए मुझे चूम रही थीं. मैंने बैठे बैठे ही उनकी चूत पर हमला बोल दिया. फिर चुदाई का असली मज़ा चालू हुआ.
अब मैं जोर जोर से भाभी जी को चोद रहा था … और वो बोले जा रही थीं- आह और जोर जोर से …

मेरा लंड उनकी बच्चेदानी तक जा रहा था. कोई 15 मिनट तक इस तरह से चुदाई का मजा लेने के बाद भाभी जी ने मुझे रोका. मैंने पूछा तो उन्होंने नीचे आने को कहा. मैंने चूत से लंड निकाले बिना ही उनको अपने ऊपर ले लिया.
बस भाभी जी मेरे लंड पर चढ़ गईं और कूदने लगीं.

चुदाई का लम्बा सफ़र चला. अब तक भाभी जी 3 बार झड़ चुकी थीं.

इसके बाद मैंने उनको डॉगी स्टाइल में खड़ा किया और चोदने लगा. ये मेरा फेवरेट आसन है, इस तरह से चुदाई में भाभी को थोड़ी तकलीफ हुई और वो रोने लगीं.

भाभी जी फिर से एक बार झड़ने लगीं. तभी मैंने भी अपनी स्पीड को बढ़ा दिया. कोई 8-10 धक्के बाद मैंने भी भाभी जी की चूत में ही अपना माल छोड़ दिया और उनसे लिपट गया.
हम दोनों एकदम से चिपक कर स्खलन का सुख लेने लगे.

चुदाई के बाद भाभी जी रोने लगीं. मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि ये खुशी के आंसू है … आज तक उनके पति ने उन्हें ऐसा यौन सुख कभी नहीं दिया था … जो आज मुझसे मिला.

अब 8 बज चुके थे. कुछ देर के बाद भाभी जी तैयार हुईं और घर जाने को बोलने लगीं. मैंने भी उन्हें गले से लगाया, किस किए.

फिर भाभी बोलीं- अब तो तुम मुझे रोज ऐसे शांत करते रहोगे न.
मैंने कहा- ये भी कोई पूछने वाली बात है.

भाभी जी मुझे चूम कर अपने घर चली गईं. हमारा ये खेल ऐसे ही करीब 5 महीने चला. मैंने उन्हें बीवी की तरह चोदा. अब वो यहां नहीं रहती हैं. मैंने जो उनके लोन का पैसा जमा करा दिया था, वो उन्होंने मुझे वापस किया. मैं ले ही नहीं रहा था, पर वो नहीं मानी.

दोस्तों जैसा कि मैंने शुरुआत में ही बताया था कि आप सबकी सेक्स कहानी पढ़ कर ही मुझे सेक्स कहानी लिखने की इच्छा हुई थी. ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, हो सकता है कि मुझसे लिखने में गलती हो गई हो, तो नौसिखिया समझ कर माफ कर देना.

आप सभी कमेंट जरूर करना कि कैसी लगी मेरी और भाभी की चुदाई की कहानी. मुझे आपके कमेंट का इन्तजार रहेगा. आप सभी के कमेंट मुझे अपनी अगले सेक्स कहानी लिखने की प्रेरणा देंगे.

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