पार्क में मिली लंड की प्यासी आंटी

नमस्कार दोस्तो, मैं विक्की आपका फिर से स्वागत करता हूँ.

आज की कहानी मेरी और एक आंटी के साथ सेक्स कहानी है.

वो ऐसा हुआ कि मैं रोज मॉर्निंग वाक पर जाता हूँ. वहीं पर मेरी इस कहानी की नायिका भी मुझे मिली. वो भी रोज वहां वाक पर आती थीं.

चूंकि मुझे ज्यादा उम्र की या आंटी टाइप की महिलाएं बहुत पसंद आती हैं. एक तो वो अनुभवी होती हैं, दूसरी बात ये कि वो किसी तरह की कोई नखरा नहीं करती हैं … और भरपूर प्यार भी देती हैं.

आपको तो मालूम ही है कि मुझे लड़की की चूत चाटना बहुत अच्छा लगता है और बड़े बड़े चूचों को चूसना भी मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसीलिए मैं कोशिश करता हूँ कि अपने से बड़ी उम्र की औरतों के साथ चुदाई की मस्ती करूं.

उन आंटी की नाम आशा था. उनकी उम्र ब्यालीस साल की थी. उनकी चुचियां 38 D साइज की थीं और यही मुख्य वजह थी कि मैं उन आंटी की ओर आकर्षित हुआ.

मैं जिस समय वाक पर जाता था, वो आंटी भी उसी टाइम वाक पर आती थीं. मैं जानबूझ कर उनके विपरीत दिशा में घूमता था ताकि मुझे उनके और उनके मस्त चुचों के दर्शन हो सकें. पार्क में छोटा राउंड होता था और जल्दी जल्दी ही मुझे उनको देखने का अवसर मिलता था.

जब भी वो मेरे सामने आतीं, मैं बड़े गौर से उन्हें और उनके मम्मों को घूरता था. उनके पास से गुजरते समय मैं एक स्माइल पास कर देता.

कुछ दिनों तक तो मुझे नहीं पता चला कि वो मुझे नोटिस कर भी रही हैं कि नहीं … पर दो हफ्ते के बाद मुझे पता चला कि अब वो भी जब मेरे सामने से निकलती हैं, तो मुझे स्माइल पास करती हैं.

पहले तो मुझे लगा शायद ये मेरा ये भ्रम है, पर अब तो वो रोज ही स्माइल पास करने लगी थीं.
अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था.

मैं वाक के बाद करीब एक घंटे योग भी करता हूँ, तो वो सामने बैठ कर मुझे नोटिस करने लगी थीं. शायद उनके मन में भी कुछ फीलिंग होने लगी थी. पर मुझे हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं किसी तरह की पहल करके उनसे बात करने की कोशिश करूं.

कुछ दिन में ही वो मेरी इस झिझक को समझ गईं.

एक दिन मैं योग कर रहा था, तो वो मेरे पास आईं और मुझसे बात करने लगीं.

मैंने भी उनसे बात करना शुरू कर दिया. आंटी मेरे बारे में अच्छी बातें करने लगीं.

वे बोलीं- तुम तो अपने आप पर अभी से इतनी ध्यान देते हो.
तो मैंने मुस्कुराकर जबाब दिया- हां मेम, ये जरूरी है.

फिर मैं भी उनकी तारीफ करने लगा कि मुझे तो आपको देख कर ही लगता है कि मैं तो कुछ भी नहीं कर रहा हूँ. आपने भी तो खुद को इतना मेंटेन करके रखा है. आपके इतना ध्यान रखने से ही तो आप इतनी खूबसूरत दिखती हैं.

मेरी बात सुनकर आंटी खुश हो गईं. वो थैंक्स बोल कर मेरी तरफ देखने लगीं.
मैं भी उनकी आंखों में झांकने लगा.

फिर उन्होंने अपने बारे में बताया- मैं अकेली रहती हूँ, तो टहलने आ जाती हूँ. सुबह घूमने से मन भी लगा रहता है और शरीर की देखभाल भी हो जाती है.
उनकी बात सुनकर मैं बोला- आप ऐसा क्यों कह रही हैं कि आप अकेली हैं … आपके फैमिली वाले भी तो होंगे.

आंटी ने एक लम्बी सांस लेकर सबके बारे में मुझे बताया.
मुझे उनसे बात करके अच्छा लगा.

तो फिर उन्होंने स्माइल पास की और बोलीं- मेरी कमर में अक्सर दर्द रहता है … तुम कोई ऐसा योग जानते हो, जिससे मेरी कमर का दर्द ठीक हो सके.
मैं बोला- हां मेम है ना … मैं अभी बता देता हूँ.

उन्होंने बोला- इधर पास ही मेरा घर है … वहीं चलकर बता देना.
मैंने बोला- ठीक है.

उनके साथ मैं उनके घर की तरफ चल दिया. उनके घर आया तो उन्होंने मुझे बैठने को बोला.

मैं सोफे पर बैठ गया और उनका घर देखने लगा. वो फ्रेश होने अन्दर चली गईं. कोई दस मिनट बाद आंटी योग करने के लिए एक चुस्त सी ड्रेस पहन कर आ गईं.

मैंने उनकी तरफ देखा, तो उन्होंने मुझे एक प्यारी सी स्माइल दे दी.

फिर आंटी ने मुझसे कॉफ़ी के लिए पूछा, तो मैंने मन में बोला कि मुझे तो तेरी चूत का पानी पीना है मेरी जान.

आंटी ने मुझसे फिर से पूछा- बताओ. क्या सोच रहे हो.
मैंने बोला- पहले मैं सोच रहा था कि आपको योग बता दूं, फिर जो भी आप पिलाओगी, मैं पी लूंगा.

मैं दोअर्थी बात करते हुए उन्हें बोला और एक स्माइल दे दी.

आंटी भी मुस्कुरा दीं और बोलीं- ठीक है जो पीना हो, बता देना.

अब मैं उन्हें योग बताने लगा, पर वो जानबूझ क़र मुझसे चिपकते हुए समझने की कोशिश कर रही थीं.

उनके घर में कोई और था नहीं … तो आंटी शायद और भी खुल कर एन्जॉय क़र रही थीं. मैं भी उनके शरीर के स्पर्श कर मजा ले रहा था और उन्हें बता रहा था. मैं कभी उनके कूल्हे टच करता तो कभी उनके मम्मों को छू लेता.

तभी आंटी ने पूछ लिया- तुम मुझे वाक में क्यों घूरते रहते हो.

उनकी इस बात से मैं एकदम से सकपका गया. फिर संभलते हुए बोला- मुझे आप अच्छी लगती हैं इसीलिए!
वो उठीं और कमर पर हाथ रखते हुए बोलीं- क्या क्या अच्छा लगता है तुझे मेरे में … तफसील से बताओ.

मैं उनकी इस अदा पर शर्मा गया और मैंने नजरें नीचे कर लीं.

वो आगे को आईं और यकायक मुझे किस करने लगीं. मेरे लिए ये एक एक सरप्राइज किस थी. मैं उम्मीद तो क़र रहा था कि आंटी को मैं पटा लूंगा, पर इतनी जल्दी सब हो जाएगा … इसकी उम्मीद नहीं थी.
मैं उनके चुम्बन का मजा लेने लगा.

वो मुझे दो मिनट तक किस करने के बाद मुझसे अलग होकर बोलीं- तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो. मैं तुम्हारी तरफ से पहल करने का बहुत बेसब्री से वेट क़र रही थी, पर जब तुमने कुछ नहीं किया, तो मैंने खुद ही सोची कि मैं ही शुरू कर दूं.

मैंने बस इतना ही कहा- इतनी भी जल्दी क्या थी?
तो आंटी ने कहा- जल्दी इसलिए कि कहीं तुमको कोई दूसरी न पटा ले.
मैं हंस दिया. मैंने कहा- मैं तो पहले से ही आप पर फ़िदा था … हां यदि आपकी तरफ से लिफ्ट न मिलती, तो अलग बात थी.

आंटी ने मुस्करा कर मेरी तरफ बांहें फैला दीं, तो मैंने उन्हें हग कर लिया और उनको चूमने लगा.

आंटी भी मुझसे नागिन सी लिपट गईं और मेरे बदन में सनसनी दौड़ने लगी. उनके चूचे मेरी छाती में गड़े जा रहे थे. उनकी गर्दन की चुम्मियां मुझे बौरा रही थीं और उनके बालों की महक मुझे पागल किये दे रही थी.

मैंने उनको अपनी बांहों में जकड़ते हुए अपने में समाने की कोशिश की तो मेरे लंड खड़ा होकर उनकी कमर से लड़ने लगा. आंटी भी मेरे कानों में गर्म सांसें छोड़ते हुए कह रही थीं.

‘यू आर टू हॉट बेबी.’
मैं भी उन्हें गर्दन पर किस करते हुए कहने लगा- यू टू डॉल.

आंटी जब ड्रेस चेंज करने गई थीं … तो अपने बदन पर सेक्सी परफ्यूम लगाकर आई थीं. उनकी उस महक से मैं मस्त महसूस करने लगा. मैं उनकी सेक्सी महक से खुद को मदहोश महसूस करने लगा था. मैंने उनको अपने से और भी ज्यादा चिपका लिया था. वो भी मेरी बांहों में झूल गई थीं और उन्होंने अपने आपको मेरे सुपुर्द कर दिया था.

मेरे कान में आंटी बोलीं- जान मैं बहुत प्यासी हूँ … आज मुझे जम कर चोद दो. मैं आज तेरी हूँ.

आंटी की डिमांड पर मैं क्या बोलता, मैं उनकी चाहत को सुनकर खुद बहुत खुश हो गया था. मैं भी उन्हें खूब मजा देना चाहता था … उनमें समां जाना चाहता था.

मैं उनके होंठों को किस करते हुए उनके मम्मों को दबाने लगा … वो भी मेरे होंठों में अपने होंठ लगाते हुए अपना रस पिलाने लगीं. वाओ क्या रस से भरे होंठ थे … मैंने जीभर कर आंटी के होंठों को चूसा. आंटी ने अपनी जीभ भी मेरे मुँह में डाल दी थी … मैं तो एकदम से पागल ही हो गया था.

शायद प्रेम करते समय मर्द और औरत के मुँह जुड़ना लंड चूत की चुदाई से कहीं ज्यादा मजा देता है. ऐसा मेरा अनुभव है … तब भी चुदाई को प्रकृति ने बनाया है. उसी से सृजन होता है … तो उससे अधिक तो कुछ हो ही नहीं सकता है.

मैं आंटी के होंठों और जीभ को चूसने के साथ साथ नीचे हाथ ले गया और उनकी चूत को कपड़ों के ऊपर से रगड़ने लगा.

अपनी चूत पर मेरा हाथ पाकर वो एकदम से मस्त और गर्म हो गईं.

चुदास की गर्मी थी और पहला मिलन था, तो कुछ ही पलों में उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

वो मेरी बांहों में अपना वजन डालते हुए बोलीं- आंह विक्की … मेरे अन्दर बहुत दिनों की आग लगी थी. ऊपर से तुमको याद करके मैं पिछले चार दिनों से तुम्हारे नाम से अपनी चूत में उंगली कर रही थी.
मैंने उनके गालों पर कट्टू करते हुए कहा- मुझे नहीं पता था कि आप इतनी प्यासी हो … एक इशारा तो दिया होता … वहीं पार्क में पटक कर ठंडा कर देता.
उन्होंने हंस कर बोला- अब तुम जल्दी से मुझे चोद दो.

पर अभी मैं जल्दीबाजी नहीं करना चाहता था. मैंने कहा- जान आज तुम्हें पूरा मजा दूंगा.
वो गिड़गिड़ाने लगीं- मजा बाद में देते रहना. पहले एक बार मुझे ठंडा कर दो.

मैंने आंटी की बात मान ली और उनको नंगी कर दिया. आंटी का क्या मस्त बदन था मेरी तो आंखें चुंधिया गई थीं. एकदम मक्खन सा चिकना शरीर न जाने कितने दिनों से किसी मर्द के सम्पर्क में नहीं आया था.

आंटी की चिकनी चूत को मैंने अपने हाथों से छुआ … आह क्या मखमली थी.

मैंने चूत पर अपनी हथेली को फेरा तो उनकी एक मादक ‘आह्ह..’ निकल गई.

फिर मैंने आंटी को लिटा दिया और उनकी टांगों को फैला कर उनकी चूत की चाशनी को चाट कर चखा.

क्या मस्त नमकीन स्वादभरी चूत थी ‘आह’
मैंने फिर से अपनी जीभ को चूत की फांकों में लगा दी और ऊपर से नीचे तक फेरने लगा.

वो तो मचलने लगी थीं और उन्होंने अपनी टांगों को फैलाते हुए चूत ऊपर उठा दी थी. वो अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगीं … और एकदम जानवरों जैसे करने लगीं. मैं भी उनकी चूत को जोर जोर से चाटने लगा.

मेरी नाक से गर्म सांसें चूत को और भी गर्म कर रही थीं. वो तो एकदम से पागल हो गई थीं. साथ मैं अपने हाथों को ऊपर ले जाकर उनके मम्मों को दबा रहा था.

कोई पांच मिनट में ही वो फिर से गरमा गईं और बोलने लगीं कि ये सब बाद में तुम खूब कर लेना मेरी जान … मगर अभी एक बार प्लीज मुझे चोद दो.

मैंने भी आंटी को ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं समझा और उनकी चूत के ऊपर लंड रगड़ने लगा. आंटी लंड के और भी व्याकुल होने लगीं और अपनी गांड उठाने लगीं. मैंने भी सुपारा चूत की फांकों में फंसा दिया और धीरे धीरे लंड चूत के अन्दर डालने लगा.

वो भी अपनी चूत को उठाने लगीं. उनकी ये बदहवासी बता रही थी कि वो जल्द से जल्द मेरे लंड को अपनी चूत में समा लेना चाहती थीं.
पर मैं धीरे धीरे लंड पेल रहा था.

उन्होंने कहा- जल्दी से अन्दर तक घुसेड़ो न … क्यों सता रहे हो?
उनका इतना कहना हुआ और मैंने एक तेज झटका मार दिया.

‘इस्सस्स … उईई … माँ मर गई..’

आंटी लंड घुसते ही बहुत जोर से चीख पड़ीं … पर मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और थोड़ा रुक रुक कर उनको किस करने लगा.

वो भी मुझे किस करने लगीं.

लंड घुसेड़ने से मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ कि उनकी चूत अभी भी टाइट थी.

मैंने पूछा, तो बोलीं- हां मैं बहुत कम चुदी हूँ, इसीलिए टाईट हूँ … और तेरी एक स्माइल पर फ़िदा हो गई थी.

मैंने समझ लिया कि इनकी चूत को कोई लंड नहीं मिला है, इसलिए ये चूत उठाए उठाए घूम रही थीं.

लंड चूत की जड़ तक पेवस्त हो चुका था. अब वो अपनी कमर को हिलाने लगीं. मैं उनका इशारा समझ गया तो अब मैं भी धक्का देने लगा और चुदाई होने लगी. चुदाई के साथ में मैं कभी उनके मम्मों को मसलता, तो कभी निप्पल को होंठों में दबा कर चूसने लगता … या कभी होंठों को चूसने लगता और स्वीट बाईट भी दे देता … तो वो मचल भी जातीं.

क्या मस्त पल थे. मैं आंटी को जोर जोर से … तो कभी धीरे धीरे पेल रहा था. पूरी चुदाई को तीन तरह के पोज़ में अंजाम दिया. करीब बीस मिनट तक आंटी की चूत चोदने के बाद मैं झड़ने वाला हो गया था.

मैंने आंटी से बोला, तो वो बोलीं- अन्दर ही आ जाओ … मैं तुम्हारे पानी को फील करना चाहती हूँ.

उनकी सहमति मिलते ही मैं तो मानो चूत पर पिल पड़ा … फिर एक जोर के झटके के साथ उनके अन्दर झड़ गया और उनके ऊपर ही ढेर हो गया.

वो भी इस दरम्यान दो बार झड़ चुकी थीं और काफी थक गई थीं.

आंटी मुझे अपनी बांहों में समेटे हुए मेरे बालों को सहलाने लगीं … और मेरे माथे पर चूमने लगीं.

इसी तरह से सहलाते चूमते मुझे और उनको कब नींद आ गई, कुछ पता ही नहीं चला.

बाद में हम दोनों अलग होकर प्यार करने लगे. उस दिन मैंने आंटी को चार बार चोदा. उसके बाद से तो जब चाहे आंटी की चूत में लंड लगा आकर चुदाई हो जाती रही थी.

तो ये थी मेरी आंटी के साथ सेक्स कहानी. दोस्तो, आगे की चुदाई की कहानी भी लिखूंगा. मगर अभी आपके कमेंट का इन्तजार है.

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