लॉकडाउन खुलते ही मैं भी खुल गयी

चुदी चुदाई की चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि लॉकडाउन में मेरा वजन बहुत बढ़ गया. मैंने पति से कहा तो उन्होंने योगा टीचर रख दिया. मगर योग के साथ में भोग भी मिल गया!

मेरे प्रिय पाठक-पाठिकाओ, आप सभी को मेरा नमस्कार. मेरा नाम अक्षिता है. मैं एक शादीशुदा औरत हूं. मेरी उम्र 29 साल है. पिछले साल ही मेरी शादी हुई थी जिसको मुश्किल से साल भर ही पूरा हुआ है.

मेरा जिस्म बहुत गदराया हुआ है. मेरे जिस्म को देखकर अच्छे खासे लोग भी अपना प्रण तोड़ देते हैं. मेरे बूब्स का साइज 32 है और मेरी कमर 30 की है. मेरे भारी भारी कूल्हे 36 के माप के हैं. मेरे फिगर के हिसाब से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मैं एक तरह से पूरी चोदू माल हूं.

मुझे अन्तर्वासना सेक्स कहानी डॉट कॉम के बारे में मेरी सहेली ने बताया था. मैंने इसकी कई कहानियां पढ़ी हैं. मुझे अच्छा लगा और अब मैं अपनी खुद की कहानी भी लिख रही हूं. यह मेरी पहली कहानी है.

यह मेरी लाइफ का पहला वाकया है जो मैं आप लोगों से शेयर करने जा रही हूं. यह मेरे साथ घटी एक सत्य घटना है. हो सकता है कि पहली बार चुदी चुदाई की चुदाई स्टोरी बताने में कुछ गलती हो जाये तो आप अपने हिसाब से एडजस्ट कर लें.

घर में मेरे और मेरे पति के अलावा और कोई नहीं रहता है. जब वह जॉब पर चले जाते थे तो मैं एकदम अकेली हो जाती थी. मेरे पति सुबह 10:00 बजे ऑफिस जाते थे और रात में 9:00 बजे वापस आते थे.

इस दौरान का समय मेरा अकेले ही व्यतीत होता था. घर पर काम भी कुछ ज्यादा नहीं था. इस कारण मैं पूरा दिन टीवी देखकर बोर हो जाती थी. मेरा वजन भी ज्यादा होने लगा था.

फिर कोरोना की वजह से लॉकडाउन हो गया. फिर अब जब काफी दिन के बाद लॉकडाउन थोड़ा खुला तो मैंने अपने पति से अपना वजन घटाने के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि वो मेरे लिए एक योगा टीचर की क्लास का इंतजाम कर देंगे.

वो कहने लगे कि टीचर क्या लाना है, उनका एक दोस्त ही है जो योगा सिखाता है. वो उसी बात करने के लिए कहने लगे. वो घर पर ही योगा करवाने आ जाया करेगा.
मैंने बोला- ठीक है. जैसा आपको सही लगे.

अगले दिन मेरे पति जॉब पर चले गए और मैं फिर से अकेली हो गई.

दिन के करीब 11:00 बजे थे घर की डोर बेल बजी. मैंने जाकर दरवाजा खोला तो मैं देखकर एकदम आश्चर्यचकित रह गई.
बाहर दरवाजे पर एक 22-23 साल का मस्त, कसे हुआ बदन वाला, गोरा-चिट्टा एक लड़का खड़ा था.

मैंने पूछा- हां जी?
उसने मुझसे कहा- अक्षिता भाभी, मैं प्रीत हूं. शायद आप मुझे नहीं जानती होंगी. भैया मुझे जानते हैं. उन्होंने मुझे योगा सिखाने के लिए आपके पास भेजा है.
मैं बोली- हां, उस बार में मेरी उनसे कल ही बात हुई थी. आप अंदर आ जाइये.

अंदर आने के बाद मैंने उसको पानी लाकर दिया. मेरी नजर पता नहीं क्यों उसके जिस्म पर बार बार जा रहा थी. उसका सुडौल और कसा हुआ बदन देखकर मैं खुद को उसे देखने से रोक नहीं पा रही थी.

फिर पहले हमने साथ में बैठकर चाय वगैरह पी और बाद में मैं उससे बातें करने लगी.
उसने मुझसे कहा- भैया का फोन आया था. मैंने उनको कह दिया था कि मैं आज से ही भाभी को योगा सिखाना शुरू कर दूंगा.

इस तरह से हम दोनों काफी सारी बातें करते रहे.
इस बीच उसने बोला- भाभी आप तो इतनी खूबसूरत हो. आपको तो अपने फिगर का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
मैं उसके जवाब में हल्के से मुस्करा दी.

मुझे भी प्रीत पहली मुलाकात में बहुत अच्छा लगा. उसकी बातें मुझे एकदम इम्प्रेस कर रही थीं.
फिर वो बोला- ठीक है भाभी, अब योगा शुरू करते हैं.
मैंने कहा- ओके, मुझे क्या करना होगा?

वो बोला- पहले तो आप ये घर के सूट और सलवार को उतार कर योगा लायक कोई अच्छी ड्रेस पहन कर आ जाइये ताकि अभ्यास करते समय कोई परेशानी न हो.

मैंने उससे कहा- ठीक है, मैं चेंज करके आती हूं.
जब मैं चेंज करके आई तो वह मुझे देखता ही रह गया. मैंने एक लाल रंग का टीशर्ट पहन लिया था और उसके नीचे काले रंग की लैगिंग पहन ली थी जो मेरी जांघों और गांड में एकदम से कस गयी थी.

फिर वो मुझे योगा करवाने लगा. पहले उसने सामने खड़ा होकर मुझे करके दिखाया और फिर खुद मुझे अपने आप से करने को कहा. मैं प्रेक्टिस करने लगी तो वो मेरे पास ही आ गया.

जहां जहां पर गलती कर रही थी वो मुझे सही तरीका बता रहा था. कभी मेरा हाथ सीधा करवा रहा था तो कभी कमर को छूकर झुकने का सही तरीका बता रहा था.

मैंने महसूस किया कि उसकी छुअन में सिखाना कम और सहलाना ज्यादा था. वैसे भी मर्दों का स्पर्श हम औरतों को अच्छी तरह से पता चल जाता है कि जो आदमी छू रहा है उसके छूने का इरादा क्या है?

मगर यहां पर एक बात थी कि उसका छूना मुझे पसंद आ रहा था. उसके हाथों में एक जादू सा था जो मेरे बदन में मस्ती भर रहा था. मैंने भी उसको कुछ नहीं कहा और उसको मुझे टच करने की परमिशन मिल गयी थी.

कई दिनों तक ऐसे ही चलता रहा. वो रोज मेरे पति के जाने के बाद आता और योगा करवाने के बहाने मेरे बदन को हर जगह से छूने की कोशिश करता. हां, लेकिन मेरी चूचियों, चूत के पास या गांड को उसने अभी तक टच नहीं किया था.
प्रीत के साथ योगा करते हुए मेरा टाइम भी अच्छा कट जाता था.

कुछ दिन के बाद पति ने पूछा- प्रीत योगा कैसा करवा रहा है?
तो मैंने भी उनको कह दिया- बहुत अच्छा करवा रहा है. मुझे लाभ मिल रहा है.

करीब 10-15 दिन बीतने के बाद एक दिन योगा सिखाते टाइम उसने मेरे पेट को छुआ. उस दिन वो अपनी गर्दन को मेरे पास ले आया और उसकी गर्म गर्म सांसें मुझे मेरी गर्दन पर महसूस हुईं.

उसकी सांसों को महसूस करके पता नहीं क्या हुआ कि मेरी आंखें बंद होने लगीं. मैं जैसे उसके जादू में बंधती जा रही थी. उसका हाथ मेरे पेट पर सहला रहा था और मैं कुछ नहीं बोल रही थी.

फिर उसने मेरी हालत देखकर पीछे मेरी गर्दन पर एक हल्का सा प्यार भरा चुम्बन दे दिया.
मैं सिहर गयी और मेरे मुंह से निकला- प्रीत …
जैसे ही उसने नाम सुना तो वो रुक गया … उसने मुझे छोड़ दिया.
हम दोनों अलग हो गये.

दोनों को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे कौन क्या कहे. न मैं उसको कुछ कहना चाहती थी और न ही उसकी कुछ हिम्मत पड़ रही थी.
मैंने उसकी आंखों में देखा तो जैसे वो कह रहा था- भाभी, आई लव यू.

जब उसने मेरे चेहरे के भाव देखे तो उसने आगे बढ़कर मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने हाथ में लेकर बोला- भाभी, मैं आपसे प्यार करने लगा हूं. पहले दिन से ही आप मेरे दिल में बस गयी थी. भाभी, मेरे प्यार को अपना लो.

वो सामने से मुझे प्रपोज कर रहा था और मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं उसकी बातों के जवाब में क्या कहूं. एक ओर तो मेरा मन उसकी ओर झुका जा रहा था.

उसके लाल होंठ, उसका गठीला ताकतवर जिस्म और प्यारी सी स्माइल. वहीं दूसरी ओर मेरा शादी के बंधन में बंधा होना और पतिव्रता होने का धर्म. दोनों में किसी एक का चुनाव करना बहुत मुश्किल हो रहा था.

मैं तो कुछ बोल ही नहीं पा रही थी.
जब उसको जवाब नहीं मिला तो वो फिर बोला- भाभी, आप बिल्कुल भी घबराइये मत, ये बात केवल आपके औरे मेरे बीच में रहेगी. घर की दीवारों को भी खबर नहीं लगेगी.

कहते कहते वो मेरे करीब आ गया और अपने होंठों को मेरे होंठों के करीब ले आया. उसने अपने होंठों को मेरे कांप रहे होंठों पर रख दिया और उनको चूमने लगा. मैं अभी भी सोच में ही पड़ी हुई थी.

मगर जब उसके कोमल होंठ मेरे होंठों के रस को खींचने लगे तो मैंने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया. मुझे अच्छा लगने लगा और मैं प्रीत का साथ देने लगी. अब मैंने उसके गले में बांहें डाल दीं और हम दोनों एक दूसरे से चिपकते चले गये.

दो मिनट के अंदर ही दोनों एक दूसरे से लिपटने लगे और जोर जोर से होंठों से होंठों को काटने लगे. उसकी जीभ मेरे मुंह में आ रही थी और मैं उसके मुंह में जीभ देकर किस का मजा ले रही थी.

अब उसने मेरे होंठों को चूसते हुए मेरे जिस्म पर हाथ फिराना शुरू कर दिया था. मैंने भी अब जैसे खुद को उसे सौंप दिया था. अब वो मेरे कपड़े उतारने लगा. धीरे धीरे करके उसने मेरा टॉप और मेरी लैगिंग दोनों निकाल दी.

मेरे गोरे बदन पर केवल मेरी काली ब्रा और काली पैंटी रह गयी थी. वो अब हवस भरी नजरों से मेरे जिस्म को ताड़ रहा था.
वो मेरे पास आया और मेरी गांड को दबाकर मुझे अपनी ओर खींच लिया. एक बार फिर से वो मेरे होंठों पर टूट पड़ा और जोर जोर से मेरे रसीले होंठों को चूसने लगा.

मेरे चेहरे को चाटने लगा. गालों पर काटने लगा. मेरे गले पर चूमते हुए वो मेरी चूचियों की घाटी में जा पहुंचा और दोनों पहाड़ों के बीच की घाटी में जीभ से चाटने लगा. उसकी जीभ मेरी चूचियों पर सरसराहट पैदा कर रही थी.

फिर उसने मुझे एकदम से पलटा और मेरे पेट पर हाथ बांधकर मेरी गर्दन पर पीछे से किस करने लगा. मैं मदहोश होने लगी. अपने नितम्बों पर मुझे उसकी जांघों के बीच से कुछ नुकीली सी चीज चुभने लगी थी.

प्रीत का लंड शायद अपने पूरे तनाव में आ चुका था और वो उसको मेरी गांड पर जोर जोर से चुभा रहा था. मुझे नितम्बों पर उसके लिंग का अहसास और ज्यादा कामुकता की ओर धकेल रहा था.

फिर वो अलग हुआ और उसने झटके में ही अपने सारे कपड़े निकाल दिये. वो केवल अंडरवियर में रह गया और उसका लिंग उसके अंडवियर में पूरा उफन रहा था.

फिर उसने मेरी ब्रा के हुक खोल लिए और मेरी चूचियों को आजाद कर दिया. मेरे दोनों आम उसके सामने नंगे थे जिनको उसने बिना देर किये अपने मुंह में भर लिया. वो जोर जोर से मेरा स्तनपान करने लगा और मैं उसके सिर को सहलाने लगी.

कभी वो मेरी चूचियों को दबाने लगता और कभी निप्पलों को मुंह में लेकर काटने लगा. पांच मिनट में ही उसके चुम्बनों ने मेरी चूत में गीलापन लाना शुरू कर दिया. अब मैं भी उसके जिस्म को सहलाने लगी थी.

फिर उसने मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहलाया और मुझे सोफे की ओर ले जाने लगा. पास जाकर उसने मुझे सोफे पर बिठा लिया और मेरी पैंटी को मेरी चूत से उतारने लगा. देखते ही देखते मेरी चूत उसके सामने नंगी हो गयी.

उसने ललचाई नजर से मेरी गीली हो चुकी चूत को निहारा और फिर मेरी टांगें चौड़ी खोल कर मेरी चूत में जीभ लगा दी. मैं एकदम से सिसकार उठी- आह्ह … प्रीत … स्स्स … क्या कर रहे हो … आह्हह!
वो बोला- भाभी, यहीं तो मर्द की जन्नत होती है.

कहकर वो मेरी चूत को जोर जोर से चाटने लगा. मैं पागल होने लगी. जोर जोर से सिसकारी लेते हुए उसके सिर के बालों को सहलाने लगी. उसने मेरी चूत को चाट चाटकर मेरी हालत खराब कर दी.

फिर वो उठा और उसने अपने अंडरवियर को निकाल दिया. उसका लंड देखकर मेरी आंखों में चमक आ गयी. 7 इंची मस्त लौड़ा था जिसका सुपारा गहरे गुलाबी रंग का था. उसके लंड पर उसका कामरस लगा हुआ था.

उसने मेरे मुंह के पास लंड को किया और मेरी गर्दन को प्यार से आगे कर दिया. इशारा तो मैं समझ गयी थी लेकिन संकोच कर रही थी. फिर उसने मेरा चेहरा ऊपर उठाया और किस देते हुए लंड चूसने की रिक्वेस्ट की.

रसीला सा लंड देखकर मैंने भी देर न की और उसके लंड को मुंह में भरकर चूसने लगी. अब प्रीत के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … अक्षिता भाभी … ओह्ह … गुड … वैरी नाइस … आह्ह … मस्त हो … आह्ह बहुत अच्छे भाभी।

अपनी एक टांग को सोफे पर रखकर वो मेरे मुंह को चोदने लगा. मैं अपनी चूत को अपने ही हाथ से सहलाने लगी. वो भी समझ गया कि अब मेरी चूत को लंड की सख्त जरूरत है.

दो मिनट तक लंड चुसवाने के बाद उसने मेरी टांगों को उठाया और मेरी चूत के लेवल पर लंड को ले आया. उसने मेरी गीली चूत पर लंड को रखा और चूत को सुपारे से सहलाने लगा. मैं चुदने के लिए तड़प गयी.

फिर उसने मेरी चूत में लंड को धकेल दिया. मेरी टांगें पकड़ कर वो मुझे वहीं सोफे पर ही चोदने लगा और मैं भी मस्ती में उसके लंड से चुदने लगी. वो पूरे जोश में मेरे जिस्म को भोग लगा रहा था और मेरी चूत में जमकर धक्के मार रहा था.

हम दोनों अब एक दूसरे में जैसे खो ही गये थे. मेरे पति का दोस्त मेरी चुदी चुदाई की चुदाई कर रहा था. वो बीच बीच में मेरे होंठों को चूसते हुए धक्के मार रहा था. मैं भी जैसे बेहोशी की कगार पर पहुंचने वाली थी. उसकी चुदाई से मैं अंदर तक तृप्त होती जा रही थी.

फिर मेरी चूत में लंड को पेलते हुए वो बोला- भाभी, आपको एक सरप्राइज़ दूं?
मैं कुछ होश में आकर बोली- क्या सरप्राइज़?

तभी उसने मेरे पति का आवाज लगाई.
मुझे तो जैसे 440 वोल्ट का झटका लगा.
ये क्या था?
पति?
और यहां, इस वक्त?

मैं उसको पीछे धकेल कर झट से उठी और फर्श पर बिछी चादर को उठाकर अपने नंगे बदन को ढकने लगी.

हम हॉल में थे. हॉल के पीछे एक रूम था. वहां से मेरे पति सामने निकल कर आए. मेरा चेहरा एकदम लाल हो गया था और मैंने अपनी गर्दन नीचे कर ली.

मेरे पति मेरे पास आकर बोले- बेबी, क्यों शर्मा रही हो? यह सब मेरा किया कराया ही है. मैंने ही प्रीत को ऐसा करने के लिए बोला था. मैं जानता था कि तुम प्रीत की तरफ आकर्षित हो जाओगी. मैं तो बस तुम्हें खुश देखना चाहता हूं.

मैं अपने पति की ओर हैरानी भर नजर से देखने लगी.
वो बोले- प्रीत बहुत समझदार लड़का है. उसी की मदद से यह सब संभव हुआ है. उसकी नीयत तुम्हारी ओर गलत नहीं थी. वो भी तुम्हें खुश देखना चाहता है.

फिर प्रीत बोला- भैया सही कह रहे हैं भाभी, इसमें कोई बुराई नहीं है. हम 21वीं सदी में जी रहे हैं. यहां हमें अपनी लाइफ को खुलकर एंजॉय करने की अनुमति है. अगर आप दोनों खुश हैं तो तीसरे आदमी के साथ सेक्स करने में कोई बुराई नहीं है।

मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. मैं चुपचाप जैसे बुत बनी खड़ी थी. फिर प्रीत और मेरे पति उस चादर को मेरे बदन पर से हटाने लगे. मैं उनसे मना करने लगी कि अब मुझसे नहीं होगा.

मगर मेरे पति मुझे किस करने लगे और प्रीत मेरी कमर पर मुझे किस करने लगा. मैं फिर से अपना कंट्रोल खोती जा रही थी. मेरे पति ने जब देखा कि मैं फिर से राजी हो गई हूं तो वह अलग हो गए और प्रीत मुझे लेटा कर मेरे ऊपर चढ़ गया.

उसने फिर से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मुझे चूसने और खाने लगा. वो फिर से चुदाई का इंजन शुरू कर चुका था और उसका पिस्टन मेरी चूत में से तेल निकालने पर तुला हुआ था. मैं मदहोशी में अपने पति के सामने ही दूसरे मर्द से चुदती रही.

बहुत देर तक चोदने के बाद प्रीत ने अपना सारा वीर्य मेरी चूत में निकाल दिया. उसका वीर्य मेरी चूत से निकलकर मेरी जांघों पर बह रहा था. मैं भी उसके लंड से चुदकर झड़ गई थी.

फिर मेरे पति मेरे पास आए और प्रीत के वीर्य से भरी हुई चूत में अपना लौड़ा डाल दिया. फिर वह भी मुझे चोदने लगे.
मैं चुदते हुए पूछने लगी- आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?

वो मुझसे कहने लगे- बेबी … बस मैं तुम्हें किसी और से चुदते हुए देखना चाहता था. देखना था कि तुम खुलेपन में कैसे किसी मर्द के साथ मजा लेती हो.

फिर मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं. मेरे पति मुझे बहुत देर तक चोदते रहे और उन्होंने भी अपना सारा वीर्य मेरी चूत में निकाल दिया. इससे ज्यादा उस दिन और कुछ नहीं हुआ. मेरे पति ने अपने ही दोस्त से मुझे चुदवा दिया था.

मुझे बहुत मजा आया. मगर अभी भी मन को समझा नहीं पा रही थी कि अपने पति की दिलदारी की तारीफ करूं या अपनी हिम्मत की जो मैं प्रीत से चुदने के लिए तैयार हो गयी?

किसी गैर मर्द के साथ वह मेरी पहली चुदाई थी. उसके आगे अब जो भी होगा मतलब मेरी चुदी चुदाई चूत की चुदाई हुई तो वो मैं आपको समय समय पर बताती रहूंगी. यह मेरी एक सच्ची कहानी थी.

जैसा मेरे साथ में हुआ था मैंने वैसा आपको बता दिया. यह घटना बीते हुए अभी 2 महीने ही हुए हैं. लॉकडाउन खुलने के बाद मेरे साथ यह वाकया हुआ है.

आपको मेरी चुदी चुदाई की चुदाई स्टोरी कैसी लगी मुझे जरूर बताइयेगा. क्या वो सब सही था? क्या मुझे आगे भी इस तरह की क्रिया में हिस्सा लेना चाहिए?
मुझे आप लोगों के सुझावों का इंतजार रहेगा.

ऐसी ही कुछ और गरमा गर्म कहानियाँ: